പുതിയ 8,9,10 ഐസിടി പാഠപുസ്തകങ്ങള്‍ പരിചയപ്പെടുത്തുന്ന ഐടി. ജാലകം - പരിപാടി (വിക്‌ടേഴ്സ് സംപ്രേഷണം ചെയ്തത്) യൂട്യൂബിലെത്തിയിട്ടുണ്ട്. .. ലിങ്ക്!
कितनी गजब की बात है खाना सभी को चाहिए मगर अन्न कोई उपजाना नही चाहता, पानी सभी को चाहिए लेकिन तालाब कोई खोदना नही चाहता। पानी के महत्त्व को समझे। और आवश्यकता अनुसार पानी का इस्तेमाल करे।
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Std: IX NEW

छिप छिप अश्रु बहाने वालों



छिप छिप अश्रु बहाने वालों

छिप-छिप अश्रु बहाने वालों!

मोती व्यर्थ लुटाने वालों!
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है? नयन सेज पर,सोया हुआ आँख का पानी,और टूटना है उसका ज्यों,जागे कच्ची नींद जवानी,गीली उमर बनाने वालों! डूबे बिना नहाने वालों!कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।
माला बिखर गई तो क्या है,खुद ही हल हो गई समस्या,आँसू गर नीलाम हुए तो,समझो पूरी हुई तपस्या,रूठे दिवस मनाने वालों! फटी क़मीज़ सिलाने वालों!कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,केवल जिल्द बदलती पोथी।जैसे रात उतार चाँदनी,पहने सुबह धूप की धोती,वस्त्र बदलकर आने वालों! चाल बदलकर जाने वालों!चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,शिकन न आई पनघट पर,लाखों बार कश्तियाँ डूबीं,चहल-पहल वो ही है तट पर,तम की उमर बढ़ाने वालों! लौ की आयु घटाने वालों!लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,लुटी न लेकिन गंध फूल की,तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर,खिड़की बन्द न हुई धूल की,नफ़रत गले लगाने वालों! सब पर धूल उड़ाने वालों!कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है!मुक्तिबोध की कहानी "पक्षी और दीमक"

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सुनो कहानी: मुक्तिबोध की "पक्षी और दीमक" 
'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में हिंदी साहित्यकार प्रेमचंद की हृदयस्पर्शी कहानी "सभ्यता का रहस्य" का पॉडकास्ट सुना था। मानवमात्र की अस्मिता, संघर्ष और राजनीतिक चेतना के साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध के जन्मदिन के अवसर पर आज हम उन्ही की एक कहानी "पक्षी और दीमक" सुना रहे हैं, जिसको स्वर दिया हैअनुराग शर्मा ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 5 मिनट 22 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।



मुझको डर लगता है कहीं मैं भी तो सफलता के चन्द्र की छाया में घुग्घू या सियार या भूत न कहीं बन जाऊँ।
गजानन माधव मुक्तिबोध (१३ नवंबर १९१७ - ११ सितंबर १९६४)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी

बेवकूफ, मैं दीमक के बदले पंख लेता हूं। पंख के बदले दीमक नहीं।
(मुक्तिबोध की "पक्षी और दीमक" से एक अंश)

Motivational Stories in Hindi

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नीचे के प्लेयर से सुनें.
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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
#Fourty Sixth Story, Pakshi Aur Dimak: Muktibodh/Hindi Audio Book/2009/40. Voice: Anurag Sharma 


जीने की कला.. / त्रिलोचन




भूख और प्यास
आदमी से वह सब कराती है
जिसे संस्कृति कहा जाता है।

लिखना, पढना, पहनना, ओढना,
मिलना, झगड़ना, चित्र बनाना, मूर्ति रचना,
पशु पालना और उन से काम लेना यही सारे
काम तो इतिहास है मनुष्य के सात द्वीपों और
नौं खंड़ों में।

आदमी जहाँ रहता है उसे देश कहता है। सारी
पृथ्वी बँट गई है अनगिनत देशों में। ये देश अनेक
देशों का गुट बना कर अन्य गुटों से अक्सर
मार काट करते हैं।

आदमी को गौर से देखो। उसे सारी कलाएँ, विज्ञान
तो आते हैं। जीने की कला उसे नहीं
आती। 
6.12.2002


Sansaar Pustak Hai - (संसार पुस्तक है)










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